Thursday, 15 September 2005

आखिर कितने घंटे करें काम

हमने अपने पड़ोस में एक लड़के को देखा और उसकी कार्य कुशलता को देखकर मैं अत्याधिक प्रभावित हुआ। 18 साल का यह युवक सुबह चार बजे अपने काम में जुट जाता है। वह सुबह में छोले कुलचे का स्टाल लगाता है। फिर शाम को बर्गर और हाट डाग का स्टाल चलाता है। यानी एक दिन में दो बिजनेस। मैंने उक उत्सुकतावश उसका रूटीन जानना चाहा। उसने कहा कि वह 24 घंटे में सिर्फ चार घंटे ही सोता है। इसके बाद भी वह स्वस्थ और तंदुरुस्त है। उसके पिता का छोले कुलचे बेचने का खानदानी काम था। 

परिवार में ही यह काम सीखने के बाद उसने अपने बूढ़े पिता को इस काम से मुक्ति दे दी है। पर विरासत में मिले इस रोजगार हो उसने 18 साल की उम्र में ही दुगुना कर दिया। वह चाहता है कि वह एक दो घंटे का तीसरा कारोबार भी आरंभ करें। आमतौर पर 18 साल के लड़के कालेज जाते हैं। बाकी समय में लड़कियों से दोस्ती करते हैं। पर अपने काम की धुन में मगन है। उसने अपनी आमदनी को तो खुलासा नहीं किया पर हमारा अनुमान है कि वह इन दोनों का कारोबार से 20 हजार रुपए मासिक तक बडे़ आराम से कमाता है। यानी कि बिना किसी बड़े डिप्लोमा डिग्री के वह अच्छा खासा रुपया कमा रहा है। वह शायद पढ़ने लिखने में अपना वक्त लगाता तो भी इतना शायद नहीं कमा पाता।

अब अगर हम एक समान्य आदमी का रुटीन देंखे तो वह किसी नौकरी में आमतौर पर सात घंटे रोज देता है। बाकी के समय वह कोई काम नहीं करता। परिवार की समस्याओं में उलझा रहता है। पर जिन लोगों ने भी अपने जीवन में प्रगति की है उन्होंने 24 घंटे में सिर्फ सात घंटे ही नहीं काम किया है बल्कि उसके बाद के समय में भी अपने रोजगार को आगे बढ़ाया है। हमें मालूम है कि निरमा केमिकल्स के मालिक ने वाशिंग पाउडर बनाने के काम को पार्ट टाइम रोजगार के रुप में आरंभ किया था। 

कई लोग अपनी नौकरी के अलावा सुबह में अखबार बेचने का काम कर लेते हैं। कई लोग नौकरी के साथ ही बीमा कंपनी या म्युचुअल फंड के एजेंट के रुप में अपने कारोबार की शुरूआत करते हैं। इससे उनकी आमदनी में इजाफा होता ही है साथ ही वे अपने साथियों की तुलना में आर्थिक रुप से काफी आगे निकल जाते हैं। हमारे एक जानने वाले बैंक कलर्क ने देखा कि सिर्फ इस नौकरी से वह ज्यादा प्रगति नहीं कर सकता। उसने एक स्टेशनरी की दुकान खोली। जहां वह सुबह और शाम को मिलाकर तीन घंटे समय देता था। कुछ सालों में दुकान ने इतनी प्रगति की कि उसने एक होल सेल स्टेशनरी की दुकान भी खोल ली। नौकरी भी साथ चलती रही।

दुनिया में तमाम उद्योगपति तथा वैसे लोग जिन्होंने काफी प्रगति की है उनका अगर कैरियर का ग्राफ देखा जाए तो पाएंगे कि उन्होंने 17-18 घंटे तक रोज काम किया है। हालांकि शरीर की भी अपनी क्षमता होती है वह ज्यादा काम करने से थकता है। पर उससे सात घंटे के अलावा भी कुछ काम तो अवश्य ही लिया जा सकता है। अगर सरकारी नौकरी में काम की हकीकत पर बात करें तो अधिकांश कर्मचारी सात घंटे दफ्तर में ईमानदारी से काम नहीं करते। कई दफ्तरों के कर्मचारी तो दिन भर में जितना काम निपटाते हैं वह महज दो घंटे का ही काम होता है। आप खुद से ईमानदारी से पूछ कर देखें कि क्या आप अपनी कार्य क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर नहीं तो थोड़ी मेहनत और करके आप अपने जीवन की रफ्तार को बढ़ा सकते हैं।
-         माधवी रंजना