Saturday, 13 January 2007

जीवन भर इनकमिंग कितनी सार्थक

लगभग सभी मोबाइल फोन कंपनियां अब जीवन भर इनकमिंग का प्लान लेकर आ गई हैं। क्या जीवन भर इनकमिंग प्लान सबके लिए बेहतर हो सकता है। क्या वास्तव में किसी मोबाइल कंपनी का कोई पैकेज आपका जीवन भर साथ निभाएगा। इस तरह के कई सवाल उठते हैं। फोन सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों का नियमन करने वाली संस्था टेलकम रेगुलेटरी आथरिटी (ट्राई) को भी इस प्लान में कई तरह पेच नजर आ रहे हैं। इसलिए ट्राई इन प्लान का अध्ययन करने में जुटा हुआ है।
सबसे पहले मोबाइल सेवा प्रदान करने वाली कंपनी हच ने सिर्फ 1000 रुपए देने के बाद आजीवन इनकमिंग की सुविधा देने की घोषणा की। कंपनी कुछ ही महीने पहले 10 रुपए का रिचार्ज वाउचर पेश करके पहले ही हंगामा कर चुकी थी। उसके दोनों नए हंगामों का लोगों ने जबरदस्त स्वागत किया। मजबूरी में बाकी कंपनियों को भी जीवन भर इनकमिंग का पैकेज उपलब्ध कराना पड़ा। इसमें सरकारी कंपनी बीएसएनएल और एमटीएनल भी पीछे नहीं रहीं। अब लगभग हर कंपनी के जीवन भर इनकमिंग का पैकेज उपलब्ध है। बस शर्त इतनी सी है कि आपको अपने सिम कार्ड को छह महीने में एक बार छोटा सा ही सही रिचार्ज कराना आवश्यक होगा। यानी बिना किसी मासिक रेंट का भुगतान किए आप अपने फोन पर इनकमिंग की सुविधा का लाभ ऊठा सकते हैं। आप चाहें तो टाप अप कार्ड लेकर आउटगोइंग काल भी कर सकते हैं। लगभग हर कंपनी ने लाइफटाइम पैकेज के साथ आउट गोइंग काल की दरें कुछ ज्यादा रखी हैं। कंपनी ने ऐसा कोई वादा नहीं किया है कि वे आउटगोइंग काल की दरें भविष्य में नहीं बढ़ाएंगी। पर जीवन भऱ आपका मोबाइल फोन नंबर आपके साथ रहेगा। हालांकि जब ट्रांसफर होकर एक जोन से दूसरे जोन में चले जाएंगे तब आपका मोबाइल नंबर बदल जाएगा और आप जीवन भर का आनंद नहीं ऊठा सकेंगे।
लाइफटाइम की सुविधा उन लोगों के लिए अच्छी है जो दूसरों से संपर्क में बने रहने के लिए मोबाइल फोन लेना चाहते हैं। जैसे आप अपने कार के ड्राइवर, स्कूल जाने वाले बच्चे, पत्नी अथवा नौकर को मोबाइल फोन देना चाहते हैं जो लाइफटाइम पैकेज आपके लिए मुफीद बैठता है। साथ ही वैसे सभी लोग जिनके पास इनकमिंग काल ज्यादा आते हों। या वैसे लोग जो इनकमिंग के लिए एक और फोन नंबर लेना चाहते हों। पर जो लोग अपने फोन से हर महीने 200 रुपए से ज्यादा की काल करते हों उनके लिए लाइफटाइम का पैकेज सस्ता नहीं है। फिर वैसे लोगों के लिए रुटीन का कनेक्सन ही ठीक बैठेगा। इतना जरूर है लाइफटाइम पैकेज कम आय वर्ग के लोगों के बीच भी मोबाइल फोन पहुंचा रहा है।

-माधवी रंजना, madhavi.ranjana@gmail.com



Monday, 1 January 2007

रिटेल मार्केट का बदलता नजारा

वर्ष 2007 में रिटेल मार्केट का नजारा बदलने वाला है। अब उपभोक्ताओं को इस क्षेत्र में असली लड़ाई देखने को मिलेगी। कई बड़े समूह बाजार पर छा जाने के लिए तैयार हैं। साल की पहली महत्वपूर्ण घटना रही है आदित्य विक्रम बिड़ला समूह द्वारा भारत के सबसे बड़े रिटेल नेटवर्क त्रिनेत्र समूह का अधिग्रहण। भले उत्तर भारत के लोग त्रिनेत्र के नाम से परिचित न हों पर दक्षिण भारत का यह एक लोकप्रिय नाम है। दक्षिण के चार प्रमुख राज्यों में इसके 175 से ज्यादा स्टोरों का नेटवर्क काम कर रहा है। त्रिनेत्र समूह को भारत के सबसे पुराने रिटेल नेटवर्क स्थापित करने का श्रेय जाता है। कुछ महीने पहले जब आदित्य बिड़ला समूह ने रिटेल सेक्टर में प्रवेश करने की बात कही थी तो यह उम्मीद थी कि वे अप्रैल 2007 से अपने स्टोरों को देश में खोलना आरंभ करेंगे। पर आजकल कारपोरेट सेक्टर में बने बनाए नेटवर्क को खरीदने या उसमें निवेश करने का चलन बढ़ा है। किसी भी नई कंपनी को अपना नेटवर्क बनाने और अपने ब्रांड को लोगों के बीच लोकप्रिय बनाने में काफी वक्त लगता है इस बात को बड़ी कंपनियां खूब समझती हैं।

भारत में रिटेल नेटवर्क को राष्ट्रीय परिदृश्य में लाने का श्रेय किशोर बियानी की पेंटालून समूह और आरपीजी समूह को जाता है। किशोर बियाना का बिग बाजार और आरपीजी रिटेल का स्पेंसर देश के कई बड़े शहरों में मेगा माल्स में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। पर इनसे भी पहले त्रिनेत्र ने दक्षिण भारत के लोगों के बीच अपनी अच्छी पैठ बना रखी थी। आदित्य विक्रम बिड़ला समूह कई क्षेत्रों में लीडर के रुप में प्रवेश करना चाहता है। पिछले साल उसने मोबाइल कंपनी आइडिया के अधिसंख्य शेयर कब्जा किया और एक सशक्त जीएसएम आपरेटर के रुप में खुद को स्थापित किया। बीमा और म्युचुयल फंड में बिरला सन लाइफ के रुप में उनकी पकड़ पहले से ही है। अब वे रिटेल में भी आ गए हैं। त्रिनेत्र के 90 फीसदी शेयर आदित्य विक्रम बिड़ला समूह ने खरीद लिए हैं। दक्षिण भारत में इस प्रकार रिटेल में उनकी उपस्थिति हो गई है। अब वे उत्तर भारत शहरों की ओर खुद को केंद्रित करना चाहते हैं।
अब अगर हम रिटेल सेक्टर में प्रमुख कंपनियों को देखें जिनके बीच उपभोक्ताओं को लेकर रोचक संघर्ष दिखाई देने वाला है उनमें प्रमुख नाम होंगे- 1. बिग बाजार (पेंटालून रिटेल) 2. स्पेंसर (आरपीजी रिटेल) 3. रिलायंस रिटेल (मुकेश अंबानी) 4. आदित्य विक्रम बिड़ला रिटेल (त्रिनेत्रा) 5. भारती वालमार्ट (सुनील मित्तल द्वारा परवर्तित 6.चौपाल (आईटीसी) 7. विशाल मेगा मार्ट 8. वीमार्ट 9. शुभिच्छा
इसके अलावा अपना बाजार, सबका बाजार सहित कई लोकल प्लेयर भी सुपर बाजारों की श्रंखला लेकर आ रहे हैं। सभी अपने स्टोरों में सामानों को सस्ते में बेचने का दावा कर रहे हैं। महानगरों लगभग सभी प्रमुख रिटेल स्टोरों की पहुंच बन चुकी है। अब इन बड़े बाजारों की दूसरे चरण में विस्तार की कोशिश में छोटे शहरों की सूची भी शामिल हो गई है। जैसे बिग बाजार ने हरियाणा के अंबाला और पानीपत जैसे शहर में अपने स्टोर आरंभ कर दिए हैं तो विशाल मेगा मार्ट हिसार, मेरठ वाराणसी और रांची जैसे शहरों में भी पहुंच गया है। अब बिग बाजार अपने छोटे स्टोर खोलकर जिला हेडक्वार्टर जैसे शहरों में पहुंचने की आकंक्षा रखता है। अभी भारत में ऐसे बड़े रिटेल स्टोरों के लिए प्रचूर संभावनाएं हैं।
---- विद्युत प्रकाश vidyutp@gmail.com