Saturday, 27 September 2008

महेंद्र कपूर- ए दुनिया तू याद रखना.....


महेंद्र कपूर नहीं रहे, क्या वे सचमुच नहीं रहे। भला एक गायक की भी कभी मौत होती है, वह तो अपने स्वर से पूरा दुनिया को आवाज दे जाता है। भले उसका शरीर जीवित नहीं होता, लेकिन उसकी आवाज तो फिजाओं में हमेशा गूंजती रहती है। आज वारिस सुनाए कहानी...ए दुनिया तू याद रखना....जी हां..महेंद्र कपूर को भी हम नहीं भूला सकते।

कुछ लोग महेंद्र कपूर को देशभक्ति गीतों को स्वर देने वाला मानते हैं। मेरे देश की धरती सोना उगले....के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। उन्होंने है प्रीत जहां की रीत सदा...जैसे गीत गाए।


....लेकिन मुझे महेंद्र कपूर का एक साक्षात्कार करने का मौका मिला था। दिल्ली के पार्क होटल में। वे अपने बेटे रोहन कपूर के टीवी शो के प्रोमोशन के दौरान आ थे। पिछले दो दशक से वे यूं तो हिंदी फिल्मों में बहुत कम गा रहे थे। पर बात 1997 की है, वे अपने बेटे रोहन कपूर का एक शो आवाज की दुनिया के प्रोमोशन सिलसिले में आए थे। शो के हीरो रोहन थे, इसलिए मुझे महेंद्र कपूर से बातें करने का मौका मिल गया सो तफ्शील से बातें की। लगभग एक घंटे। तब मीडिया में नवागंतुक पत्रकार था। मेरे लिए महेंद्र कपूर का साक्षात्कार करना एक बड़ा अनुभव था। लिहाजा मैंने बहुत सी बातें उनसे पूछ डालीं।
रोमांटिक गीत ज्यादा गाए - महेंद्र कपूर ने बताया था कि बार बार लोग कहते हैं कि मैंने देशभक्ति गीत ज्यादा गाए हैं, पर मेरे रोमांटिक गीतों की लिस्ट ज्यादा लंबी है।


...हुश्न चला है इश्क से मिलने गजब की बदली छाई....

आधा है चंद्रमा रात आधी रह न जाए तेरी मेरी बात आधी


नीले गगन के तले धऱती का प्यार फले


तेरे प्यार का आसरा चाहता हूं वफा कर रहा हूं वफा चाहता हूं (धूल का फूल)


किसी पत्थर की मूरत से....


मेरा प्यार वो है....( ये रात फिर ना आएगी)


तेरे प्यार की तमन्ना....


तुम अगर साथ देने का वादा करो मैं यूं हीं मस्त नगमें....

ऐसे न जाने कितने गीत हैं जो प्यार करने वाले लोगों की जुबां पर हमेशा थिरकते रहते हैं। पर महेंद्र कपूर को इस बात का भी कत्तई मलाल नहीं था कि उन्हें लोग देशभक्ति गीतों के चीतेरे के रूप में जाने।
म्यूजिक कंप्टिसन की देन थे...हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को गायक महेंद्र कपूर एक म्यूजिक कंप्टीशन की देन थे। जैसे आज के दौर में श्रेया घोषाल या सुनिधि चौहान। उस दौर में टीवी नहीं था। ऐसे म्यूजिक कंप्टिशन बहुत कम होते थे। पर महेंद्र कपूर को मोहम्मद रफी जैसे लोगों ने बहुत प्रोमोट किया था।

महेंद्र कपूर - 9 जनवरी 1934- 27 सितंबर 2008

सबस बडी बात कि महेंद्र कपूर को पर शुरूआती दौर में भी किसी गायक की नकल का आरोप नहीं लगा जैसा कि रफी साहब और मुकेश पर कुंदनलाल सहगल की नकल का आरोप लगता है। पर महेंद्र कपूर उसी पंजाब से आए थे जिस पंजाब ने हमें कुंदन लाल सहगल और मोहम्मद रफी जैसे सूरमा दिए।
महेंद्र कपूर का खानदानी बिजनेस था जरी के काम का जिससे वे गायकी के साथ आजीवन जुड़े रहे।
जब फिल्मों में तेज बीट वाले गीत आने लगे तब महेंद्र कपूर अत्याधिक चयनशील हो गए थे। उन्होंने बीआर चोपड़ा की सुपर हिट फिल्म निकाह के गीतों को स्वर दिया जिसके लिए उन्हें खूब याद किया जाता है। ....अभी अलविदा न कहो दोस्तों न जाने फिर कहां मुलाकात होगी....बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी। ख्वाबों में ही हो चाहे मुलाकात तो होगी....
भोजपुरी फिल्मों में भी गीत गाए...हिंदी पंजाबी के अलावा महेंद्र कपूर ने भोजपुरी फिल्मों के लिए भी खूब गीत गाए...भोजपुरी की सुपर डुपर हिट फिल्म बिदेशिया में उनका गीत...हंसी हंसी पनवा खिववले बेइमनवा....एक विरह का गीत था...जिसको भोजपुरी संगीत के सुधी श्रोता कभी नहीं भूल पाएंगे। जब इंटरव्यू के दौरान मैंने महेंद्र कपूर से भोजपुरी गानों के बारे में पूछा तो उन्होंने यही गीत मुझे गुनगुना कर सुनाया था।


पटना से था लगाव - महेंद्र कपूर को पटना शहर से खास लगाव था। वे दुर्गा पूजा के आसपास होने वाले संगीत समारोहों में कई बार पटना जाकर मंच पर गा चुके थे। वहां के श्रोताओं की वे खूब तारीफ करते थे। बीआर चोपड़ा की तो खास पसंद थे महेंद्र कपूर। उनकी कई फिल्मों में स्वर तो दिया ही था....टीवी पर जब महाभारत धारावाहिक बना तो उसका टाइटिल गीत....जी हां....सीख हम बीते युगों से नए युग का करें स्वागत....जी हां महेंद्र कपूर साहब नया युग आपको हमेशा याद रखेगा। कभी नहीं भूलेगा।

- विद्युत प्रकाश मौर्य

Monday, 8 September 2008

समझदार ग्राहक बनिए.. तोल मोल कर खरीदें

कभी भी बड़े शापिंग माल्स में जाकर आंखें मूद कर खरीददारी नहीं करें। उनके द्वारा सस्ते में बेचे जाने के दावों की अच्छी तरह जांच परख कर लें। अगर तीन चार बड़े शापिंग माल्स, हाइपर मार्केट के सामनों की कीमतों का तुलनात्मक अध्ययन करें तो कई बार आप सामान की कीमतों में अंतर पाएंगे। इसलिए अगर आप आंख मूंद कर एक ही माल्स से सामान लगातार खरीद रहे हैं तो इसमें कभी कभी चेक भी करें। इससे आप ठगे जाने से बच सकेंगे। 

 आप यह कत्तई मानकर नहीं चलें कि आप जिस सुपर बाजार से सामान खरीद रहे हैं वह सबसे सस्ता सामान बेच रहा है। कई बार ये शाप कुछ बड़े शापों के कीमतों का तुलनात्मक अध्ययन करता हुआ विज्ञापन भी जारी करते हैं। जिसमें ये दावा करते हैं कि वे सबसे सस्ते में सामान बेच रहे हैं पर इसकी हकीकत कुछ और ही होती है...

अक्सर शापिंग माल में कुछ खास सामानों की कीमतें तो कम कर दी जाती हैं और उनका बढ़ा चढ़ाकर विज्ञापन किया जाता है कि हम ही सबसे सस्ते में सब कुछ बेच रहे हैं, पर इसी माल में बाकी सब सामान अधिक दाम पर बेचा जाचा है। ग्राहक चीनी, नमक जैसे कुछ सामानों को सस्ते में खऱीदकर समझता है कि वह सस्ते में सब कुछ खरीद रहा है। पर आपको असलियत का पता नहीं होता है। यही शापिंग माल आपसे दूसरे प्रोडक्ट पर मोटी राशि वसूल रहा होता है। दरअसल कुछ सामानों की कीमतें ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए की जाती है। पर ग्राहक कुछ सामानों की कीमतें देखकर धोखे में आ जाता है। 

इसलिए एक जागरूक ग्राहक होने के नाते आपको अलग अलग शापिंग माल के कीमतों में हमेशा तुलना करके देखते रहना चाहिए कि कहीं आप ठगे तो नहीं जा रहे हैं। जब आप किसी शापिंग माल से खरीददारी करें तो सामानों की लिस्ट के साथ घर पर मिलान करके देखें की रेट लिस्ट में आपको सामान को एमआरपी से कितने कम में दिया गया है, या फिर आपसे एमआरपी ही वसूली जा रही है। अगर आपसे अधिकतर उत्पादों पर एमआरपी ही वसूली जा रही है तो आपको कोई लाभ नहीं हो रहा है। क्योंकि एमआरपी पर तो अधिकतर दुकानदार ही सामान बेचते हैं। क्या है एमआरपी- अब आप ये भी समझ लिजिए की एमआरपी क्या है। एमआरपी यानी मैक्सिम रिटेल प्राइस। किसी वस्तु का वह मूल्य है जो किसी भी रिटेलर के लिए बेचने का अधितम मूल्य निर्धारित है। इसमें वैट भी शामिल होता है। 

कोई दुकानदार इससे ज्यादा राशि पर तो कोई सामन बेच ही नहीं सकता। हां इससे कम में वह चाहे तो बेच सकता है। प्रतिस्पर्धा के दौर में दुकानदार एमआरपी से कम मूल्य पर भी सामान बेच सकते हैं। इसके लिए सरकार की ओर से कोई रोक नहीं है। ऐसे में आप यह जांच जरूर करें कि दुकानदार एमआरपी से कितने कम मूल्य में आपको सामान दे रहा है।

ऐसे में एक जागरूक ग्राहक के नाते आप हमेशा बड़े बड़े शापिंग माल्स से खरीददारी का भी तुलनात्मक अध्ययन करते रहें। इससे आप हर महीने सैकड़ो रुपये ठगे जाने से बच सकेंगे। कई बार शापिंग माल में कोई राशि जितने में मिल रही होती है उससे ज्यादा सस्ते में बाजार में अन्य रिटेल की दुकान में भी मिल जाती है। इसलिए कभी भी आंखें बंद करके खरीददारी नहीं करें।
- विद्युत प्रकाश मौर्य
(CONSUMER, MARKET, SHOPPING )