Sunday, 17 May 2009

म्युचुअल फंड में निवेश कर करें कर बचत


अगर आप आयकर में राहत चाहते हैं तो पीपीएफ या एनएससी जैसे परंपरागत साधनों के बजाय म्युचुअल फंड के इएलएसएस ( इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम)के बारे में भी सोच सकते हैं। ये आकर्षक रिटर्न देते हैं। जब आप डाकघर या बैंक की बचत योजना में निवेश करते हैं तो आपका रुपया आठ साल के लिए ब्लाक हो जाता है जबकि इक्वीटी में आपका रुपया तीन साल बाद निकाला जा सकता हैयानी यहां तीन साल का लाक इन पीरियड होता है।


डाकघर से बेहतर निवेश- मान लिजिए आप पीपीएफ खाते में निवेश करते हैं तो आपको आठ फीसदी सालाना की दर से ब्याज मिलता है। वहीं राष्ट्रीय बचत पत्र में अधिकतम ब्याज की राशि 8.14 फीसदी तक होती है। साथ ही इसमें निवेश के तरीके भी सीमित ही हैं। पर आपको म्युचुअल फंड के इक्विटी में निवेश के लिए तमाम विकल्प मौजूद हैं। अधिकांश म्युचुअल फंड कंपनियों के पास कई टैक्स सेविंग प्लान मौजूद हैं। आप किसी पुराने प्लान में निवेश कर सकते हैं वहीं आप किसी नए फंड आफर (एनएफओमें भी निवेश कर सकते हैं। एनएफओ में आपको 10 रुपए का यूनिट सम मूल्य पर ही प्राप्त होता है जबकि पुराने फंडों में आपको यूनिट बाजार मूल्य यानी नव (नेट एसेट वैल्यूपर खरीदना होगा। अक्सर एनएफओ में निवेश फायदे का सौदा साबित होता है। आमतौर पर कोई भी एनएफओ तीन साल की अवधि में दुगुना या अधिक जरूर हो जाता है। अगर हम इस साल देंखे तो अगस्त में खुला रिलायंस का टैक्स सेवर फंड अभी 14 रुपए से अधिक का हो गया है। यानी चार महीने में 40 फीसदी की वृद्धि। यहां हम आपको दो लोकप्रिय इएलएसएस का उदाहरण देना चाहेंगे। फ्रैंकलिन टैक्सशील्ड प्लान जो 1999 में खुला था आज 122रुपए यूनिट के आसपास है। यानी 90 फीसदी से भी ज्यादा ग्रोथ। इसी तरह बिड़ला का 96 प्लान आज 200 रुपएके करीब पहुंच गया है।
अब इन प्लान की तुलना आप पीपीएफ या एनएससी से करें। किसी व्यक्ति ने बिड़ला के टैक्स सेवर प्लान में 1996 से लगातार 1000 रुपए मासिक निवेश आरंभ किया होगा तो अभी तक वह 1.30 लाख रुपए निवेश कर चुका होगा। 8 फीसदी ग्रोथ से यह राशि 3 लाख रुपए के आसपास घूम रही होगी। जबकि यही राशि बिड़ला सनलाइफ के प्लान में 14 लाख रुपए से ज्यादा हो चुकी होगी।

योजना बद्ध तरीके से करें टैक्स बचत- आप किसी भी वित्तीय वर्ष में टैक्स के लिए सेविंग की योजना बनाएं मान लिजिए आपको साल में 60 हजार रुपए बचत के लिए निवेश करने की जरूरत है तो आप पांच हजार रुपए मासिक की दर से हर माह निवेश किया करें। इससे आपको वित्तीय वर्ष के आखिरी महीनों यानी फरवरी और मार्च में परेशान नहीं होना पड़ेगा जो लोग प्लानिंग नहीं करते उन्हें अक्सर मार्च महीने का वेतन टैक्स सेविंग और कटौती के बाद शून्य ही प्राप्त होता है। जब इएलएसएस में बचत की योजना बनाएं तो फंड का चयन सोच समझ कर करें। पुरानी कहावत है कि सभी अंडों को एक ही टोकरी में नहीं रखना चाहिए ठीक उसी तरह अपने रुपए को अलग फंडों में लगाएं। मान लिजिए आपके 30 हजार रुपए हैं तो उन्हे 10 हजार के अलग अलग तीन फंडों में निवेश करें।
यह मान कर चलें कि म्युचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है। इसलिए यहां गारंटिड रिटर्न की उम्मीद नहीं है। प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर भी हो सकता है तो खराब भी। इसलिए आप जोखिम सोच समझ कर ही उठाएं। 


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  (MONEY, MUTUAL FUNDS ) 

गांव में बनाएं आशियाना

मुंबई के एक अखबार ने एक विज्ञापन छापा है। सिर्फ आठ लाख रुपए में गांव में खरीदें अपना घर। उसके साथ पाएं खेती करने के लिए थोड़ी सी जमीन भी। यानी अब कई बिल्डर आपको गांव में मकान बना कर दे रहे हैं। यह इस बात का सूचक है कि काफी लोग अपने सूकून भरे दिन अब गांव में गुजारना चाहते हैं। इनमे वैसे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने कभी गांव नहीं देखा हो। ऐसे तमाम लोगों को मिलाकर एक नए गांव का निर्माण हो रहा है। यह आपके सपनों का गांव भी हो सकता है।
शहर के अपार्टमेंट में बालकोनी पर लटके हुए वक्त गुजारने के अच्छा है कि गांव में आपका घर हो और उसमें एक छोटी सी फुलवारी भी हो। अगर यह गांव शहर के पास ही हो तो क्या कहना। जब आपके पास अपनी कार हो तो जब चाहे आधे घंटे में शहर की ओर पहुंच जाइए। जब चाहे फिर गांव की ओर वापस। इसलिए कई लोगों के जेहन में अब यह ख्याल आ रहा है कि गांव में रहे तो अच्छा हो। अगर गांवों को योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया हो तो बात ही क्या है।
फिलहाल गांवों में खुली हवा होती है घर भी होते हैं पर आम तौर घर बनाते वक्त शहरों जैसी प्लानिंग नहीं की जाती है। पंजाब के कई गांवों आर्किटेक्ट की मदद से योजना बनाकर घर बनाते देखा जा सकता है। आमतौर पर यह देखा गया है कि गांवों में लोगों के पास जमीन की कोई कमी नहीं होती इसलिए लोग अपनी जरुरत के हिसाब से घर में विस्तार करते जाते हैं। अगर यही घर योजनाबद्ध तरीके से बनाए जाएं तो इसके कई फायदे हो सकते हैं। इसलिए अब अगर आप आप अपने गांव के घर को भी नया रूप देने के मूड में हैं तो उसका नक्सा किसी वास्तुकार से बनवा लें तो अच्छा रहेगा। गांव के घर में रेनवाटर हार्वेस्ट सिस्टम लगवाया जा सकता है। इसके साथ ही सोलर लाइटिंग सिस्टम लगवाने पर भी विचार किया जा सकता है। मोटर गैराज और गोबर गैस प्लांट पर भी विचार कर सकते हैं।
बैंक लोन भी - अगर आप गांव में घर बनवाने के लिए कर्ज लेना चाहते हैं तो उसके लिए भी कई बैंक हाउसिंग लोन देने को तैयार बैठे हैं। इसमें आईसीआईसीआई बैंक से बात करते हैं वह गांवों के घर के निर्माण के लिए खास तौर पर कर्ज दे रहा है। इसके अलावा जिस बैंक के आप पुराने ग्राहक हैं वहां भी कर्ज लेने के लिए बातचीत कर सकते हैं।
रूरल हाउसिंग प्रोजेक्ट - कई राज्यो में गांवों में योजना बद्ध तरीके से सेक्टरों का विकास किया जा रहा है। हरियाणा में 10 हजार से अधिक आबादी वाले गांवों में हाउसिंग डेवलपमेंट आथरिटी सेक्टरों का निर्माण करने जा रही है। इसमें लोग अपने घर नियोजित तरीके से बना सकेंगे।
अब अगर को ई यह दंभ भरता है कि वह शहर में रहता है तो यह कहीं से भी कोई गौरव की बात नहीं है। लोगों को यह पता चल गया है कि शहरी जीवन के क्या क्या नुकसान है। सबसे बड़ा नुकसान तो यही है कि वहां शुद्ध हवा तक नहीं मिलती। ऐसे में गांव में रहने के अपने फायदे हैं। दिल्ली व मुंबई में हजारों ऐसे लोग हैं जो अपने ही शहर में रहते हुए रोज दफ्तर आने जाने में 2+2 चार घंटे गुजार देते हैं। आप दिल्ली मुंबई के कई कोने से आसपास के किसी गांव में भी एक या दो घंटे में जा सकते हैं। यहां गांव में रहकर आप जो सुकुन और आराम महसूस कर सकते हैं वह शहरों में नहीं मिल सकता है। आजकल कई ऐसी बीमारियां भी हैं जो शहरों को लोगों को ही ज्यादा होती हैं। इसलिए आप बेहतर जीवन के लिए किसी गांव में जाने के बारे में सोच सकते हैं।