Monday, 23 November 2009

लालू जी हम भी गरीब हैं (व्यंग्य)

लालू जी बड़े गरीब नवाज हैं। जहां भी रहते हैं गरीबों की सुध लेते हैं। गरीबों को सपने दिखाने में उनका कोई सानी नहीं है। लिहाजा उन्होंने रेलवे में भी गरीबों के लिए नई रेलगाड़ी शुरू कर दी है। गरीब रथ। इस गरीब रथ में देश की जनता जनार्दन वातानुकुलित कोच में चलने का आनंद उठा सकेगी वह भी सस्ते में। 
इस रेलगाड़ी में चलने के लिए आपको यह घोषणा करनी पड़ेगी कि आप गरीब हैं तभी आप गरीब रथ में सवार हो सकेंगे। पर क्या यह रेलगाड़ी गरीबों की गरीबी का मजाक उड़ाती नहीं प्रतीत होती है। आखिर आज के दौर में कौन खुद को गरीब कहलाना पसंद करता है। सभी लोग अमीर बनना चाहते हैं। भले ही कोई जेब से फकीर हो पर वह नहीं चाहता है कि उसे कोई गरीब कहे। अगर किसी ने गरीब रथ में यात्रा कर ली तो अब उसके नाम के आगे तो मार्का ही लग जाएगा कि वह गरीब है। किसी गरीब को अगर आप याद दिलाएं कि वह गरीब है तो वह इसे अपने आत्मसम्मान पर ले लेता है। भला तुम कौन होते हो मुझे गरीब कहने वाले। क्या है तुमसे मांग कर खाते हैं।
गरीब भले ही गरीब हो पर वह अपने आत्मसम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। वह फिर उसी सेकेंड क्लास के डिब्बे में जलालत और गरमी के बीच यात्रा करना चाहेगा पर खुद को गरीब डिक्लियर करके गरीब रथ के वातानुकूलित कोच में नहीं बैठेगा। वहीं जो लोग चालू पुर्जा किस्म के हैं, भले ही उनके पास पैन कार्ड हो इनकम टैक्स भी जमा करते हों पर सस्ती यात्रा करने के लिए थोड़ी देर के लिए गरीब बन जाएंगे। कई अमीर लोग हमेशा गरीब ही बने रहना चाहते हैं। वे अपनी असली आमदनी का खुलासा नहीं करना चाहते। वे अमीर की चादर में गरीबी की पेबंद लगाकर सोना चाहते हैं। वे ऐसा करके देश के गरीबों को और सरकार को धोखा देते हैं। वे आयकर विभाग को चकमा देकर चूना लगाते हैं। तो भला ऐसे लोगों को रेलवे को चकमा देने में कौन सी देर लगेगी। कहेंगे लो जी हम भी गरीब हैं। हमें भी गरीब रथ का टिकट दे दो। इस तरह अमीर भी लूटेंगे सस्ते में गरीबी का मजा। पर यह क्या लालू जी आप तो गरीबों की आदत बिगाड़ रहे हैं। 

गरीबों के घर में तो अभी तक बिजली भी नहीं पहुंची है। पंखे भी नहीं लगे हुए हैं। जिनके घर में पंखे लगे हुए हैं वे भी भला कौन सा हमेशा पंखे में सो पाते हैं। क्या करें बिजली रानी ही नहीं आतीं। अब भला जिन्हें पंखे भी नसीब नहीं हैं वे कुछ घंटे के लिए अगर गरीब रथ के वातानूकुलित डिब्बे में सफर कर लेंगे तो उनकी आदत नहीं बिगड़ जाएगी। वे फिर घर वापस आएंगे तो उसी मुफलिसी का सामना करना पड़ेगा। कहेंगे अरे बापू ट्रेन में बड़ी प्यारी नींद आई थी। गरमी के दिन में भी ठंडी ठंडी हवा चल रही थी। अब गांव वापस आने पर फिर से सूरज की गरमी से चमड़ी जल रही है। यह गरीबों की गरीबी का मजाक नहीं तो और क्या है। थोड़ी देर के लिए उनको ठंडी ठंडी हवा में सपने दिखा देते हो। अगर असली गरीबों के हमदर्द हो तो पहले उनके घरों को वातानूकुलित करने की योजना बनाओ न। तुम तो सिर्फ सपने दिखाने में लगे हुए हैं। गरीब रथ में सफर करके लौटने के बात एक तो अपनी गरीबी का एहसास हो ही जाता है। उपर से अपनी गरीबी पर बड़ा रोना भी आता है। किसी शायर ने कहा है-
आधी-आधी रात को चुपके से कोई जब मेरे घर में आ जाता है।
कसम गरीबी की अपने गरीब खाने पर बड़ा तरस आता है।
 इसलिए लालू जी कुछ ऐसा इंतजाम कीजिए कि एक अदद एयर कंडीशनर हमारे गरीबखाने में भी लग जाए।
- vidyutp@gmail.com


Tuesday, 17 November 2009

रेलवे और सस्ते एयरलाइनों में टकराव

कई सस्ते एयरलाइनर जिन्हें हम लो कास्ट एयरलाइन कहते हैं अब रेलवे के एसी 2 टीयर के बराबर किराे में हवाई यात्रा का सुख दे रहे हैं। ऐसे में भारतीय रेल को प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है। जैसे आपको दिल्ली से मुंबई या चेन्नई जाना है तो आपको लो कास्ट एयर लाइन का टिकट 2500 से 4000 रुपए में मिल जाता है। वहीं रेलवे के एसी 2 टीयर में भी 2500 रुपए तक किराया देना पड़ता है। ऐसे में रेलवे के उच्च वर्ग में सफर करने वाले लोगों पर लो कास्ट एयर लाइनों की नजर है। वहीं एयर डेक्कन जैसे एयर लाइनों का सूत्र वाक्य है कि लोगों को पहली बार हवाई यात्रा के ख्वाब दिखाना। एक मध्यम वर्ग का आदमी एक बार हवाई यात्रा कर लेगा तो शायद बार बार करना चाहेगा।

अभी आसमान में एयर डेक्कन, स्पाइस जेट, गो एयर, इंडिगो सहारा और पैरामाउंट एयरवेज जैसे हवाई संचालक लोगों को सस्ते में उड़ने के सपने दिखा रहे हैं। इन विमान सेवाओं ने प्राइवेट रेल टिकट बुक करने वालों को हवाई टिकट बुक करने के लिए कुछ इंसेटिव देना भी आरंभ कर दिया है। यानी आप रेल टिकट बुक कराने जाएंगे तो आपका एजेंट आपको हवाई जहाज से चले जाने के फायदे बताएगा।
अब स्पाइस जेट और एयर डेक्कन आदि एयरलाइनरों ने रेलवे के राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस के डिब्बों में अपने विज्ञापन देने की नीति भी अपनाई है। जिससे इस क्लास के लोगों को हवाई यात्रा करने के लिए आकर्षित किया जा सके। एक सर्वे के अनुसार रेलवे के 3 फीसदी यात्री उच्च वर्ग के लोग हैं। वे बड़े आराम से हवाई यात्रा में लो कास्ट एयरलाइन को अपना सकते हैं। अगर इनमें से एक फीसदी भी हवाई यात्रा करने लगे हो हवाई यात्रियों में 35 फीसदी का इजाफा हो सकता है। कुछ एयरलाइन कंपनियां पंपलेट पोस्टर और विज्ञापनों से रेलवे के यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश में लगे हुए हैं।
अब रेलवे भी अपने यात्रियों का आधार खोना नहीं चाहती है इसलिए वह हर रेल बजट में रेल यात्रियों के लिए कुछ आकर्षक आफर लेकर आती है। पिछले साल रेलवेके एसी 2 टीयर में सफर करने वाले यात्रियों के लिए भारतीय स्टेट बैंक के साथ लांच शुभयात्रा क्रेडिट कार्ड में डिस्काउंट की पेशकश की गई है। इस साल के रेल बजट में उम्मीद की जा रही है राजधानी और शताब्दी जैसी रेल गाडि़यों में कई तरह के डिस्काउंट की घोषणा की जा सकती है। पिछले साल रेलवे ने अपग्रेडेशन प्रणाली आरंभ की है जिसके उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। वहीं सस्ते में वातानूकुलित क्लास में यात्रा की परिकल्पना को साकार करने वाली गरीब रथ ट्रेन को भी लोगों ने अपनाना आरंभ कर दिया है। अगले रेल बजट में कुछ और नए मार्ग पर भी गरीब रथ जैसी रेल गाडियों की घोषणा हो सकती है या फिर कुछ पुरानी गाडि़यों को पूरी तरह वातानुकूलित बनाने की योजना पेश की जा सकती है।
अगर आप दिल्ली से चेन्नई रेल से जाते हैं तो दो दिन लग जाते हैं वहीं आप हवाई जहाज से यही सफर मात्र दो घंटे में तय कर लेते हैं। इस तरह आपके दो दिन की बजत होती है। अगर आपकी एक दिन की आमदनी एक हजार रुपए है तो आप हवाई सफर करके आप दो हजार रुपए की बजत भी करते हैं। इस अर्थशास्त्र को समझें तो हवाई यात्रा करना आपके लिए सस्ता भी हो सकता है।